स्मृति ईरानी को शायद अभी आप भूले नहीं होंगे वे काफी समय से मोदी सरकार से नाराज़ होकर अपना बोरिया बिस्तर समेट कर सास भी कभी बहू थी के किरदार में वापस आ गईं थीं लेकिन पत्रकार मधु किश्वर के खुलासे से अचानक उनका ख़ून खौल उठा है लेकिन विचित्र किन्तु सत्य यह है कि वे मधु किश्वर की जगह राहुल गांधी पर अनर्गल प्रलाप कर रही हैं।
संभव है मोदी जी ने फिर से उनकी सेवाओं को लेकर लोगों का ध्यान राहुल गांधी की ओर बांटने अपनी सुयोग्य साथी को लगा दिया हो। क्योंकि मोदी और स्मृति के संबंधों को मधु ने नाम लेकर उजागर किया है। कंगना रनौत के आरोप मखौल बन रहे थे इसलिए भी उन्हें स्मृति का स्मरण आ गया होगा। मोदी जी के प्रति अटूट श्रद्धा समर्पण जो भी कहें स्मृति पुनः राजनैतिक सुर्खियों में आ गई हैं।
एक बयान में वे कह रही हैं कि राहुल गांधी का खानदान मोदी के चरणों की धूल के बराबर नहीं है। स्मृति ने उन पर कई चारित्रिक आरोप भी लगा डाले हैं। इससे पहले कंगना रनौत कह चुकी हैं कि वे एक बाप की औलाद हैं तो भाजपा को हरा कर देखें। मोदी जी की प्रिय ये दो महिलाएं जिनमें एक पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं और दूसरी सांसद हैं को क्या ऐसी जुबान बोलनी चाहिए? कोई है जो इन बेलगाम औरतों के ख़िलाफ़ एक्शन लेगा? शायद नहीं।
क्योंकि ये तो भाजपा के स्टार हैं उनका कोई कुछ नहीं कर सकता। इस तरह के प्रचारक भाजपा की पताका फहराते हैं और सम्मानित होते हैं। इनमें निशिकांत दुबे, गिरिराज सिंह भी कम नहीं हैं। क्यों ना हों जब सिरमौर इस मामले में अव्वल हों। मन में जो आए बोले जाओ कोई रोक टोक नहीं। ये तो भाजपाई संस्कृति के प्रतीक हैं।
बहरहाल, स्मृति ईरानी का अचानक अपने रुख में परिवर्तन की वजह कुछ खास ही होगी। अभी चंद महीनों की ही बात है स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी की राजनीति में बदलाव का जिक्र करते हुए कहा था कि वह अब अलग तरह की राजनीति कर रहे हैं, जिसे भाजपा को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उन्होंने राहुल के ‘टी-शर्ट’ वाले बयान को युवाओं को साधने की कोशिश बताया और उनके ‘सॉफ्ट हिंदुत्व’ के रुख पर भी टिप्पणी की, जबकि साथ ही यह भी कहा कि राहुल पर हमला बोलना अब उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं है।
इसके बाद अचानक आई राहुल गांधी पर तल्ख़ बयान बाजी के बारे में कई अटकलें लगाई जा रही हैं पहला तो कमज़ोर होते मोदी की लाज बचाना, दूसरा राहुल गांधी की बढ़ती लोकप्रियता में खलल डालना है। ये बयान बाजी साज़िश के तहत हो रही है। मोदी जी धर्मसंकट में हैं। उनकी छवि को धूमिल होने से बचाने के सबसे वाचाल और झूठ बोलने में माहिर सती सावित्री स्मृति को लगाया गया है।
किंतु सोशल मीडिया पर जिस तरह स्मृति जी की पवित्र गाथाओं को उकेरा जा रहा है उससे यह अहसास हो रहा है कि मोदी जी का यह दांव भी निष्फल जाएगा।
आज के दौर में जब दुनिया के आका और मोदी जी के माई फ्रेंड ने झूठ बोलने में हमारे पीएम को पीछे कर दिया है। जो यह दुखद है इसीलिए चुनाव में मुंह छुपाए मोदी जी की जगह अब स्मृति ईरानी ने संभाल ली है। यह रहस्य बरकरार है कि ये वापसी फिर से कैसे और क्यों संभव हुई?
(सुसंस्कृति परिहार का लेखिका और एक्टिविस्ट हैं।)